चीन की कारस्तानी व हमारी विदेश नीति

भारत चीन सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है।लेह लद्दाख सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय व चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में दोनों ओर से कई सैनिकों के हताहत होने की खबरें आ रही हैं।समाचार पत्रों व मीडिया चैनल की खबरों व रक्षा मंत्रालय के सूत्रों से पुष्ट खबर के अनुसार हमारे देश के 20 जाबांज सीमा पर शहीद हुए हैं।यह खबर भारत के लिए बेहद चिंताजनक है।हम अभी कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं उस वक्त सीमा पर तनाव व चीनी सैनिकों की यह करवाई अत्यंत दुखद व निंदनीय है।इस घटना के विरोध में देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।पूरे देश में जगह जगह चीनी राष्ट्रपति के पुतले फूंकें जा रहे हैं और चीनी सामानों के बहिष्कार के नारे लगाए जा रहे हैं।
हम वर्षों से पाकिस्तान की सीमा पर तनाव झेल रहे हैं पर 1962 के बाद चीन की सीमाओं पर कोई ऐसी हरकत नहीं हुई थी देश को चीन से कोई खतरा महसूस होता।  हाल के कुछ वर्षों में चीन ने हमारी सीमाओं को कई बार लांघने की कोशिशें की है।बीते वर्ष भी उत्तरपूर्व की सीमाओं पर चीनी सैनिकों के घुसपैठ व भारतीय भूभाग के अतिक्रमण की खबरें आई थी।थोड़ा तनाव उत्पन्न हुआ था लेकिन विदेश मंत्रालय की कूटनीतिक पहल से वो मुद्दा शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया।
पर गलवान घाटी में हुये इस झड़प में हमारे देश के 20 सैनिक मारे गए हैं जिसमें एक मेजर स्तर के सैन्य पदाधिकारी भी हैं।टी वी चैनलों पर दिखाई गई वीडियो फुटेज को देखने से इस घटना की अजीबोगरीब सच्चाई सामने आ रही है।आमतौर पर सीमाओं पर होने वाली गोलीबारी में सैनिकों के हताहत होने की खबरें तो आती रहती हैं पर इसमें सैनिकों को बिल्कुल आमने सामने गुत्थमगुथ्था होते हुये दिखाया गया है।कहा जा रहा है कि चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सीमाओं के अतिक्रमण हुआ था।ततपश्चात उभरी परिस्थितियों में कमांडिंग ऑफिसर स्तर के बीच एक वार्ता आयोजित की गई थी उस वार्ता में भाग लेने गए भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला किया गया।
इस तरह की कायराना हरकत की कड़ी निंदा की जानी चाहिये व भारत सरकार को चीन की इस कायराना करवाई का मुंहतोड़ जबाव दिया जाना चाहिये।
न यह 1962 है जब हमारी सेनाओं के पास हथियारों की कमी थी न आज देश में वैसी राजनीतिक परिस्थिति है।देश की जनता ने मोदी जी को जिन वजहों की वजह से पुनः सत्ता सौंपी उसमें एक प्रमुख वजह यह भी थी की बीते वर्ष पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को करारा जबाव दिया था।
चीनी सैनिकों के इस नापाक हरकतों का भी उसी अंदाज में जबाव दिया जाना चाहिये।सर्वप्रथम भारत सरकार इंडो चीनी व्यापार पर प्रतिबंध लगाए और उसके आर्थिक हितों पर चोट करे।दूसरे इस शहादत का बदला भी उसी अंदाज में ले जैसा पाकिस्तान के साथ लिया था।
सैनिकों की शहादत से पूरा देश मर्माहत है व आक्रोश व्यक्त कर रहा है।विश्व की बदलती परिस्थिति व भारत में एक मजबूत सरकार के रहते यह सम्भव है वरना विश्व में भारत के बेहतरीन सैन्य ताकत की बात जुमला ही साबित होगा।

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