बिहार की बदहाली से सभी परिचित हैं साथ साथ बिहार के बाहर बिहारियों के श्रम व बुद्धि का भी सब लोहा मानते हैं।फिर बिहार बदहाल क्यों हैं?वर्तमान बिहार मुख्य तौर पर कृषि प्रधान राज्य है।उद्योग के नाम पर बरौनी रिफाइनरी, बाढ़, कांटी, कहलगांव, बरौनी व नवी नगर का थर्मल पावर स्टेशन।मधेपुरा का इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव असेम्बली प्लांट,हरनौत का रेलवे कोच मरम्मत वर्कशॉप,मुंगेर का सिगरेट फैक्टरी,जमालपुर का रेलवे वर्कशॉप,कुछ चीनी व आयरन रोलिंग मिल इत्यादि उद्योग के रूप में गिने जा सकते हैं।उपरोक्त्त फैक्टरियों में भी automatisation की वजह से वर्कर्स की संख्या काफी कम है।अभी बरौनी रिफाइनरी ही एक मात्र ऐसा उद्योग है जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में हजारों लोगों को रोजगार मुहैया करवाता है।बिहार की बड़ी आबादी व उनकी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिये यह काफी नहीं है।यही कारण है कि बिहारियों को मजबूरन रोजी रोटी की तलाश में दूसरे विकसित राज्यों का रुख करना पड़ता है।
अब सवाल है कि इस समस्या का समाधान क्या है और सरकार की पहल क्या है?
मेरी राय में इसका एकमात्र समाधान है स्वरोजगार !
बिहार की आर्थिक व सामाजिक उन्नति के लिये स्वरोजगार एक कारगर उपाय साबित हो सकता है और यह बिना सरकारी सहयोग से सम्भव भी नहीं है।बिहार सरकार के उद्योग मंत्रालय को एक दीर्घजीवी योजना बनाकर पहल करनी चाहिये न के जुमलेबाजी होनी चाहिये।हाल के लॉक डाउन से हुये रिवर्स माइग्रेशन के बाद बिहार के CM, भारत के PM ने बिहारियों को उनके घर में ही रोजगार उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है पर देखना है कि कहीं यह जुमला न रह जाये।
1 टिप्पणियाँ
बेहतरीन व सराहनीय प्रयास
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